बिहारी अिस्मता की लड़ाई लड़ने वाले 27 सपूतों को श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आगामी 12 सितंबर 2009 को सम्मानित किया जायेगा। इनमें 15 प्रवासी बिहारी, सात गैर बिहारी व पांच बिहार में रहकर बिहार के विकास में अहम योगदान देने वाले सपूत होंगें। पिछले वर्ष आयोजित सम्मान समारोह का अनुभव काफी प्रेरक रहा है और दूसरे प्रदेशों में चर्चा का विषय बना। इस वर्ष सम्मान समारोह में मॉरिशस, कतर, दक्षिण कोरिया एवं सिंगापुर में कार्य कर रहे बिहारी समूतों को भी सम्मानित किया जायेगा।

सम्मान समारोह का उÌेश्य
बिहारी अिस्मता सम्मान का आयोजन बिहार व बिहारियों के प्रति दूसरे प्रदेशों में फैली नकारात्मक नजरिये की एक उपज मात्र है। क्षेत्रियता से नहीं राष्ट्रीयता से प्रभावित इस पहल में देशवासियों का परिचय उन महानुभावों से कराना है जिन्हें वह नित्य देखते हैं, सुनते हैं, उनके योगदान को नमन करते हैं किंतु वे यह नहीं जानते कि वह उसी माटी के समूत हैं जिसे कुछ लोग दोयम दर्जे के मानते हैं। पूर्व राष्ट्रीपति डा. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने बिहार विकास से संबंधित अपने भाषणों और लेखों में इस बात को बार-बार दुहराया है कि बिहार में विकास के बगैर भारत 2020 का सपना कभी पूरा नहीं हो सकता और बिहार के विकास में रह रहे बिहारी समाज के पास है। पूर्व में बिहार की ऋणात्मक छवि के कारण यह समाज मुखर रूप से सामने नहीं आया, किंतु बर्तमान दौर में बिहार बदलाव की राह पर है और प्रवासी बिहारी समाज के सहयोग से प्रदेश को उसका पुराना गौरव वापस दिया जा सकता है। आज गुजरात संपन्न है तो उसमें अहम योगदान प्रवासी गुजरातियों का रहा है। सैकड़ों बिहारी समूत दूसरे प्रदेशों में अपनी योग्यता का लोहा मनवा रहे हैं, किंतु कई दशक से हमलोंगों ने उन्हें प्रदेश की वस्तुस्थिति से अवगत कराने का प्रयास भी नहीं किया है। अपनी सफलता का कुछ अंश प्रदेश को देने को बेताब प्रवासियों को एक मंच प्रदान करने में सूबा अब तक विफल ही रहा है। इस रिक्ति को `बिहारी अिस्मता सम्मान समारोह` जैसे कार्यक्रम के जरिए भरने की कोशिश की जा रही है। इस सम्मान का उÌेश्य बिहार और बिहारियों के विकास से जुड़ा है,

समारोह का प्रथम चरण
`बिहारी अिस्मता सम्मान समारोह` पहली बार वर्ष 2008 के नवंबर माह में संपन्न हुआ था। छोटे और कम अनुभव वाले टीम की पहल को सबने सराहा, जिसका परिणम है कि आज इस अभियान से पांच हजार से ज्यादा लोग सक्रिय रूप से जुड़े है। महाश्वेता देवी ने इस पहल को सराहते हुए कहा है कि यह प्रयास डेंगी से समुद्र लांघने जैसा है और यह कार्य धरती पर कईयों ने कई बार कर दिखाया है। प्रथम वर्ष में समाज के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में अपनी लोहा मनवा रहे कुल 27 विभूतियों को सम्मानित किया गया जिसमें 18 प्रवासी बिहारी व 9 गैर बिहारी रहे। इस समारोह में पिश्चम बंगाल से आए कोलकाता के पूर्व मेयर व सांसद श्री श्याम सुंदर गुप्ता, भोजपुरी विकास के पुरोधा श्री अजीत दूबे, हिन्दुस्तान टाइम्स (भोपालद्ध के संपादक श्री एन.के.सिंह, एम्स दिल्ली के चिकित्सक डा. कुमार हर्ष, दिल्ली के सांसद श्री महाबल मिश्रा, भोजपुरी फिल्मों के महानायक श्री कुणाल सिंह, फिल्म निर्देशक श्री देवेन्द्र पथिक, संगीतकार श्री संजीव राणा, फिल्म निर्माता व वितरक श्री अभय सिन्हा, रंगकर्मी व समाजसेवी (मुंबईद्ध डा. बलवंत शास्त्री, व्यवसायी (नागपुरद्ध श्री अरूण कुमार सिंह, पुल व बांध निर्माता (विलासपुरद्ध श्री शंभु प्रसाद सिंह, दिल्ली से आए शिक्षाविद् श्री अमिताभ राय, दिल्ली के समाज सेवी डा. विनय बिहारी `भैया`, अखिल भारतिय अपराध विरोधी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री धनवंत सिंह राठौर, साहित्यकार व पत्रकार डॉ. मधुकर गंगाधर, दिल्ली से आए गायक श्री राजेश पाण्डेय, फिल्म निर्माता व व्यवसायी श्री मुतुZजा जाफरी, गैर बिहारी क्षेत्र में दिल्ली के समाजसेवी श्री अशोक रंधवा, मुंबई नगरपालिका के पूर्व उपायुक्त श्री जी.आर. खैरनार, झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास को समर्पित श्री श्याम सुंदर आर्य, भवन निर्माता (मुंबईद्ध श्री रजनीकांत मेहता, सांस्कृतिक कर्मी व वरीय पुलिस पदाधिकारी श्री अरविंद पाण्डेय, वरीय पत्रकार (मुंबईद्ध श्री करण हिन्दुस्तानी, सिने तारिका सुश्री रानी चटर्जी, भोजपुरी फिल्म प्रोत्साहन के लिए श्री विनोद कुमार गुप्ता और नोएडा के व्यवसायी श्री नईम शाह को बिहारी अिस्मता सम्मान 08 से सम्मानित किया गया।

उक्त सभी सम्मानित लोग भिन्न-भिन्न कार्य क्षेत्रों में विशेषज्ञ की हैसियत रखते हैं, लेकिन उनमें एक बात समान थी कि वे सभी किसी न किसी प्रकार बिहार और बिहारियों के विकास में अपना सक्रिय योगदान दे रहे हैं। उनके इस अहम योगदान को `बिहारी अिस्मता सम्मान समारोह` के जरिए पूरे देश व दुनिया के सामने लाना ही हमारा मकसद है।

सम्मान के हकदार
इस सम्मान के हकदार वे सभी हैं जो किसी ना किसी रूप से बिहार और बिहारियों के विकास के लिए कार्य कर रहे हैं, चाहे वे किसी प्रदेश के हों।

:
E-mai : kuldeep2005@gmail.com
घिनौना गोबर पर ढेला मारब त, घिन घिना जाइ सगरो
|