इलेक्ट्रॉनिक्स मीडिया के माघ्यम से विश्व पटल पर भोजपुरी भाषा को स्थापित करने, सम्मानित करने, नई-नई प्रतिभाओं को खोजकर दुनिया के सामने प्रस्तुत करने और भोजपुरी को गैर भोजपुरी भाषियों में भी लोकप्रिय बनाने का जो करिश्मा मात्रा ढ़ेड-दो साल में महुआ चैनल और इसके प्रणेता श्री पी के तिवारी ने किया है वह ऐतिहासिक है। यही कारण है कि आज भोजपुरी के हरेक क्षेत्र के महारथियों के लिए श्री तिवारी आदर्श बन गए हैं। एक सुर में सबका यही कहना है कि श्री पीके तिवारी ही इस सदी के भोजपुरिया महानायक है।
इस सदी के भोजपुरिया महानायक की खोज के लिए पूर्वांचल एक्सप्रेस की टीम ने एक सर्वे कराया, जिसमें 46 प्रतिशत से श्री तिवारी का नाम टॉप पर रहा। जबकि 35 प्रतिशत से रवि किशन दूसरे नंबर पर और श्रीमती सरिता वूध् मॉरिशस 19 प्रतिशत से तिसरे नंबरी पर रही। इस सर्वे से यह निष्कर्ष निकला है कि जैसे, भगीरथ ने ध्रती पर गंगा को लाया, उसी प्रकार भोजपुरिया मनोरंजन की सुखी धरती, बल्कि यूं कहे कि दशको से प्यासी धरती को श्री पीके तिवारी ने महुआ रूपी गंगा का अमृतपान करा कर भोजपुरी भाषियों को एक ऐसा सौगात दिया है, जिसे भुलाया नही जा सकता।
कोई कुछ भी कहे अंग्रेजी ग्लोबलाजेशन की वजह से आए भाषाई संकट में भी भोजपुरी अपना परचम लहरा रहा है और दिन ब दिन और भी लोकप्रिय होता ता रहा है। तो इसमें सबसे बडा हाथ या श्रेय भोजपुरी गीत संगीत का हैं। कजरी, झुमर, सोहर, चइता, फगुआ कोई अंग्रेजी में नही गा सकता। सुर संग्राम के माघ्यम से महुआ टीवी ने भोजपुरी को न सिर्फ एक नई उंचाई दी है बल्कि कई चैनलो को एका कडा मुकाबला भी। महुआ चैनल की वजह से आज पंजाबी, मराठी, गुजराती व बंगाली लोग भी भोजपुरी गाना गुन गुना रहे है। सुर संग्राम के अलावा बाहुबली, छोटकी बहु, खानदान, भौजी नंबर वन आदि कार्यक्रम भी कम लोकप्रिय नही है और लोग इन सब शो की चर्चा करते नही थकते।
चैनल खोलने की बात सदी की शुरूआत से ही खुसुर-फुसर होने लगी थी। लेकिन बिल्ली के गले में घण्टी बाँधने का चुनौती भरा काम श्री तिवारी ने ही किया। श्री तिवारी पहला भोजपुरी चैनल महुआ खोलकर भोजपुरी भाषा, कला-संस्कृति एवं कलाकारों को लोगो के बेड रूम तक पंहुचाया। इस तरह श्री तिवारी भोजपुरिया इलेक्ट्रॉनिक्स मीडिया में एक नये युग का सूत्रापात कर इतिहास पुरूष बने गए है। महुआ टीवी एवं श्री तिवारी की वजह से ही कभी गंवारू कही जाने वाली भोजपुरी आज गर्व की भाषा बन गई है।
सदियो से घिरे अंधेरे में अचानक रोशनी लाकर श्री तिवारी ने भोजपुरी के लोकप्रिय शायर मनोज भावुक के इस शेर को चरितार्थ कर दिया है।
खुद नया सूरज उगावे के
एह तरी तम के भगावे के
:- कुलदीप श्रीवास्तव
संपादक
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