लखनऊ , ३ अक्टूबर। अब भोजपुरियन लोग हर साल २ नवम्बर के "विश्व भोजपुरी दिवस" के रुप में मनाई। ई खुलासा आजु एगो प्रेस वार्ता में विश्व भोजपुरी सम्मेलन के अंतर्राष्ट्रीय महासचिव डा. अरुणेश नीरन कइलन।
भोजपुरी सेवा संस्थान के रचल एगो प्रेस वार्ता में आजु
पत्रकारन से बातचीत करत डा. अरुणेश नीरन कहलन कि अब हर साल २ नवम्बर "विश्व भोजपुरी दिवस" के रुप में मनावल जाई। २ नवम्बरे काहे? ई सवाल पूछला पर ऊ कहलन कि अपना देश से सभसे पहिले भोजपुरी लोग गिरमिटिया मजदूर का रुप में मारिशस के धरती पर २ नवम्बर, १९३४ के पहिला हाली डेग धइले रहे लोग। एह से बहुत सोच विचार के हर साल २ नवम्बर के "विश्व भोजपुरी दिवस" मनावे के निरनय लिहल गइल बा। डा. अरुणेश नीरन एह घोषना का संगे संगे मनोज श्रीवास्तव के बनावल विश्व भोजपुरी दिवस के लोगो भी मीडिया कर्मियन का सोझा जारी कइलन।
प्रेस वार्ता में मउजूद भोजपुरी सेवा संस्थान के अध्यक्ष डा. दिनेश तिवारी कहलन कि आजु विश्व पटल पर सउँसे भोजपुरियन के एक सूत्र में बन्हला के दरकार बा। एही से "विश्व भोजपुरी दिवस" के घोषना सोआगतजोग आ भोजपुरियन ला गरब के बात बा। ऊ भरोसा से कहलन कि सउँसे दुनिया में "विश्व भोजपुरी दिवस" धूमधाम से मनावल जाई। ऊ इहो कहलन कि अंतर्राष्ट्रीय पयमाना पर एकरा के पसारे में विश्व भोजपुरी सम्मेलन के उठावल डेग तारीफ करे लायक बा।
एह मउका पर भोजपुरी सेवा संस्थान के महासचिव मनोज श्रीवास्तव कि २ नवम्बर , १९३४ के दिने मारिशस के अप्रवासी घाट पर पड़ल भोजपुरियन के डेग के परमान पोर्ट लुई के अप्रवासी घाट, "जेकरा के अब यूनेस्को विश्व धरोहर घोषित क चुकल बा" पर बा। ऊ इहो कहलन कि २ नवम्बर पर देश के नामी भोजपुरिया साहित्यकार लोग भी आपन सहमति जता चुकल बा।
एही मउका पर एगो भोजपुरी सेवक आर.के. पाण्डेय भोजपुरिया लोगन के स्वाभिमान के हिफाजत के संकलप लेत आपन वनावल एगो झंडा के लोकार्पन करउलन। ऊ कहलन कि भोजपुरिया लोग अपना घर पर ई झंडा टांगि के आपन एकता आ बाहुल्यता गरब से जाहिर क सकेला।
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घिनौना गोबर पर ढेला मारब त, घिन घिना जाइ सगरो
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